Sunday, March 20, 2022

चुप सा है आँगन मेरा इस मौन में संगीत भरने

 #WorldPoetryDay   


en.unesco.org/commemorations इन ग़मों का हर अँधेरा दूर करने को प्रिये तेरे अधरों की ये हल्की मुस्कुराहट ही बहुत है चुप सा है आँगन मेरा इस मौन में संगीत भरने चम्पई पैरों में पायल की ये आहट ही बहुत है

~ ज़ोया गौतम ' निहां ' 

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..namastey!~