Wednesday, March 16, 2022

मयक़शी का मै बहाना चाहता हूँ

 9:46 PM · Mar 16, 2022Twitter Web App  

 



मयक़शी का मै बहाना चाहता हूँ

होश से पीछा छुड़ाना चाहता हूँ


देख कर फूलों पे वो शबनम का क़तरा अश्क़ इक मैं भी गिराना चाहता हूँ मैं नहीं था जिस्म भी मेरा नहीं था सोच भी कुछ सूफ़ियाना चाहता हूँ

भूलना तुझको कभी आसां कहाँ था तेरी यादों को भुलाना चाहता हूँ बेख़ुदी होगी तो फिर ये ग़म न होंगे इस ख़ुदी को ही मिटाना चाहता हूँ

~ ज़ोया गौतम ' निहां ' 

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..namastey!~